geetkumar
Jun 16, 2015 8:41 PM
हलका हलका सा ये नशा, बहका बहका सा ये समा
आ जा ना जानेजां, आ जा ना ये समा, जाए ना
क्यों भला सपनों के पिछे, दिल मेरा अपनों के पिछे खोता है
ख्वाहिशे आवारा बन के तूट जाए तारा बन के, होता है
होता है कल मगर, बीता जो पल अगर, आए ना आए ना