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Rahuldai
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Posted on 12-23-09 8:13
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~ चौतारी १७०~
 नयाँ बर्ष तथा क्रिस्मस पर्ब बिशेष
  
हाँसो ठट्टा र खुसी बाँड्दै, र मुक्तक, कविता, गजल, कथा आदिमा रमाउँदै अनेकन उकाली ओरालीहरु पार गरेर हामी चौतारीको १६९ औं संस्करणमा आइपुगेका छौं।अहिले यस चौतारी सिमाना पूर्व मेचीबाट बढेर जापानसम्म पुगेको छ भने पश्चिम महाकालीबाट बढेर अमेरिकासम्म बढेको छ।अत एव, सधैं घाम लागिरहने पनि यस चौतारीको विशेषता हो। यस्तो चौतारीमा पाल्नुहुने तपाईंहरुलाई कोटी कोटी स्वागत छ। "जात,धर्म्,लिंग,राजनिति,भाषा,ब्यक्तिगत रिसइबी जस्ता कुरालाइ तिलाञ्जली दिएर मात्रै 'हामी नेपाली' हौ भन्ने र एकआपसमा मित्रभावले रामाइलो गर्न आउनेहरुलाइ चौतारीको बर-पिपल ले हार्दिक स्वागत गर्छ"

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन | मा कर्मफलहेतुर्भिः मा ते सङ्गोस्त्व कर्मणि ||
आउनुहोस सधैँझैँ यसपाली पनि नयाँ चौतारीमा थकाई मारौँ मायापिरती साटौँ, हाँसो ठट्टाले यो दुईदिने जीवनलाई उल्लासमय बनाउँ! मिठो मिठो खाउँ र खुसि रहौँ!
यो चौतारीको डिलबाट बिहान सुटुक्क पारीपट्टि चिहाउँदा...आहा! कस्तो मनै आनन्दित तुल्याऊने दृष्य!! त्यो सुनौलो धौलागिरी! त्यो पाखा, त्यो बारी, त्यो पाठशाला, त्यो पसल, त्यो गैह्रो, त्यो लाँकुरी.... कठै त्यो मेरो गाउँ!!


हिमाल माथि घामले सिन्दूर हालेको कहाँ छ ?
सुन हे यात्री यो देश मेरो नेपाल जहाँ छ!
हेर्दामा खाउँ खाउँ चौँरीको छुर्पी खाँदामा चाम्रो ल्हास्सो ल्हास्सो ल्हास्सो शेर्पीनी दिदीले हाँसेको हेर कतिमा राम्रो ल्हास्सो ल्हास्सो ल्हास्सो
Meet the world's finest school teachers, unbeatable students, mischievous senior citizens,wildest , vacationing revolutionaries, rethinking moderates, instant dreamerspoets, gifted story-tellers, pot smokers,alxoholics, workoholics,home-makers, pretty damsels, fierce contenders, homelanders,laa- hoo-rays, all on the stage of Chautari of Sajhaland (World's first and finest internet IMPROV in Nepali language)
Last edited: 23-Dec-09 08:31 AM
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Birkhe_Maila
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Posted on 12-28-09 10:03
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जदौ! बैरे बिक्रम बस्न्यात र लहरेकान्त लाकौल ज्यू! हजूरहरुको गाथमा आरामै होला भन्ने कामना पशुपतीनाथसंग गर्दछु। धन्यवाद्
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serial
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Posted on 12-28-09 10:05
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तिम्राँ मुखले कामना नगरेपनी हाम्राँ गाथ मा आरामै छ बुढा
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Rahuldai
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Posted on 12-28-09 10:08
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तारेमाम लहरे अनी बैरे । हिउ परेर रमाइलो हुने ठाम कुन पर्यो ? हिउ परे सि त जनजीवन ठप्प हुन्छ गाँठे यता त ।

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बैरे
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Posted on 12-28-09 10:09
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बौचा किन नेप्र्या नेप्र्या कुरा गर्छ ??  आज को राशी फल हेर त !!!  बिर्खे बा हजुर को गाथमा आरामै होला भन्ने कामना पशुपतीनाथसंग गर्दछु।
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Birkhe_Maila
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Posted on 12-28-09 10:10
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लहरेका काल तिम्रो खुट्टामा ठेस लागोस, टाउकामा टुटुल्को उठोस, भुँडि पोलेर फत्र्याक फत्र्याक पर्नु परोस, ढाड दुखोस, कम्मर मर्कियोस, निद्रा नलागोस पर्भु। मेरा मुखले सराप नदिए पनि सपैकुरो हुने होला नि अब!
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serial
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Posted on 12-28-09 10:29
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तिम्राँ किरा पर्न नसक्या मुखाँ भाको बङरा झार्न पर्या हो बुढा को नली खुट्टा फेरी टेप ले जोड्न नपरोस्
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ritthe
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Posted on 12-28-09 10:55
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नयाँ साल आउँदैछ यसो राम्रो राम्रो कुरो गर्नु सुन्दै कानै त्रिप्त हुने गरेर ! इनारु त खाली सराप्या सरापै गर्छन् बाइ !  फेरी अर्को चार दिन बिदा भन्दा ३ दिन अघी को जदौ ! जिम्माल बा, ठुल्दाइ, क्रेजी, लहरे, बैरे सबैलाई सञ्चै होला भन्ने आशा छ ! 
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perfectionist
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Posted on 12-28-09 11:40
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पर्खाइमा भिज्यो सिरानी सम्झनीमा बित्यो सपनी चाँडैफर्कि आउ, ए मेरी मायालु देउराली सुन्य लाग्छ माया तिमी नहुँदा मुटु मेरो त्यसै जल्छ, स्पर्सले नछुँदा चाँडैफर्कि आउ, ए मेरी मायालु लौ यो चिसो थामबाट तात्तातो प्रणाम! आज त निक्कै चहलपहल रेछ याँ! भनेछी सप्पैको बिदा चाइँ मस्त बितेछ क्यारे! मेरा नि ठिक्-ठिकै भो  । तर जे होस् हस्तिनापुर भन्दा पनि काइदाको थाम चाइने हुने रेछ बै! बाँच्न मात्र पर्छ के के देखिन्छ देखिन्छ भन्या चाइँ साँची रेछ बै! शहर, ठाउँ चाइँ बनाकै रेछन बाSSSSSSS इनिहरुले! क्रेजी पर्मात्माको नेपाल बसाइ अनी फिर्ती सवारी पनि राम्रै भयो होला केरे भन्ने मान्या छु! जिम्मालबा र बज्यै न्यानो पारेर सिरक भित्रै होलान केरे बैरे पाटको खै के के गर्यौ त सुनाउ केरे, नयाँ खेलाउनाको सदुपयोग त धेरै गर्यौ होला केरे भन्ने मानेको छु, हाम्ले पनि हेरम भन्या केरे रिट्ठेको क्या मोज फेरी ४ दिन बिदा रे, हाम्रा त जम्मा ३ दिन ल सप्पैलाई प्रणाम गर्दै एक्छिन पछी आउँछु है भन्न मात्र आको म त ठुल्दाइ सँग, ठुल्दाइको कार्य-ब्यस्तताले गर्दा गफ्-गाफ हुन सकेन क्यारे। यौतो बज्येको गाम तिर नि पुग्या, कस्तो वैयात थाम रेछ भने, अब अरु ब्रितान्त त खै के भन्नु, बुझ्निले बुझी हाले होला, नबुझ्नेलाई के सम्झाइ भो र
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Harka_Bahadur
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Posted on 12-28-09 11:48
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Namaste jammai laai.............
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ritthe
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Posted on 12-28-09 12:00
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हिउ परी ठक्ठकी जाडो भो एक्लो जीवन आँफैलाई घाँडो भो पानी है परि स्याल्घारी करायो भुन्टी है सित मस्की मस्की हिंड्ने मेरो रहर कता हरायो बाउ ले बिहे गर्देनन् पोर पनि भत्काइदिन्छु सुङुर को खोर पनि ल्या ज्ज्जा हन पुरे को कत्ती लामो बिदा हो? अब एक्कै चोटि जन ४ मा फर्किनी गरी हो कि क्या हो? घुम्या घुमै छ जस्तो छ केटो ! हन कता तिरी हुइकेउ ए पुरे? हर्के नि जिम्दै रेछ भनेर भुइसी ले लात्ता हान्या अन्मार देखाउन आयो जस्तो छ !  बिस्टे, चिप्ले कता लागेछन आज? 
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perfectionist
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Posted on 12-28-09 12:18
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<<< हन पुरे को कत्ती लामो बिदा हो? अब एक्कै चोटि जन ४ मा फर्किनी गरी हो कि क्या हो? घुम्या घुमै छ जस्तो छ केटो ! हन कता तिरी हुइकेउ ए पुरे?>>> के खाएर हुन्थ्यो नि ४ जन सम्मको बिदा, यी एइ अड्डा पुगी सकेँ नि
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Birkhe_Maila
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Posted on 12-28-09 12:24
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जदौ! रिट्ठे पुरे र हर्के, के चौतारीका सबै बिदाबाट फर्के? तारेमाम्।
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khushii
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Posted on 12-28-09 12:25
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jadau chautarika ek ek sablai except for the one!!! :D
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ritthe
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Posted on 12-28-09 12:29
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अरु को के कस्तो छ चाइन्जो थाहा खैन ! आफ्नो त यि जोड तोड का साथ हसुराइ चलिराछ ! अरु कुरा तेस्तै हो, खुशीको नि सवारि चलेछ ! कस्तो भो त किस्मस? 
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perfectionist
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Posted on 12-28-09 12:34
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अँ जिमालबा, म त फर्कें केरे, अरुको चाइने थाहा भेन खुशीले चाइँ कुन यौतोलाई exception मा पर्या होला त, खै कुन्नी, मैले त बुझिन है, लहरे त पक्कै हैन, मलाई थाहा छ, अरु अब को पर्यो होलाSSSSSSSS
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Madness
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Posted on 12-28-09 12:42
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जे राम जि कि। सब लोगनको करिसमस जो छ बडो मजेदार भयो होला। हमरो भि झकास भयो। सब गावँले लोगनको परनाम्। जे राम जि कि।
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khushii
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Posted on 12-28-09 12:50
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kina lahare hoina pure? lahare nabhae ko ta?  ritthe dai gajjab bho ni  timi gaeu ta prashante lai herna?
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perfectionist
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Posted on 12-28-09 12:53
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एह साँची जिमालबा रामे खै त? आ छैन त केटो आज! अझै छुट्टी मै छ कि क्या हो अ मदन्वा-चा, प्रणाम गरेर ल्यायो ल मैले ट टिम्लाई
Last edited: 28-Dec-09 12:54 PM
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Madness
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Posted on 12-28-09 1:04
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जे राम जि कि पुरैया दाजु। खुसिया सुन्द्रीको भि हमि तहे दिलसे हाय करेछु- "हाय खुसिया!"
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Madness
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Posted on 12-28-09 1:11
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खुसिया सुन्द्रि हमको ईगनाँर कियो जे राम जि कि, परनाम हमि सभिसे बोले थियो गपसाँपके ढोका हमि आठ मिनट पहले खोले थियो उसके हँसिके इन्तजार हमि बार बार कियो पर कथि करने खुसिया सुन्द्री हमको ईगनाँर कियो जे राम जि कि।
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