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world_map
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Posted on 01-02-07 2:02
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ठूली, तिम्रो लागि कविता यो :) चौतारी नै रमाइरहेछ तिम्रो आगमनमा फूलपात फर्फराइरहेछन् शीतल पवनमा तिमीलाइ देखी हाँस्यो फेरी मेरो मन कति अन्जान अनौठो छ यो बन्धन
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uptowngal
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Posted on 01-02-07 2:18
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Birkhe_Maila
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Posted on 01-02-07 2:29
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ओहो ठुल्नानि! नेपाल को राम्रो राम्रो फोटो टाँसन है?
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hetterika!!
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Posted on 01-02-07 2:38
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ओहो ठुल्नानि! नेपाल को राम्रो राम्रो फोटो टाँसन है?
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Posted on 01-02-07 2:38
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वाह वाह ! चित्रे। मयाँ पिरती होस त यस्तो। आफ्नो त जुरेली अझै भेना कै चङ्गुलमा छे। :-( सिरे जवैँ कता मोरेचन आज ? हिजो बात मार्दा मार्दै फ्वाँ फ्वाँ निधाए। भोलि चौतारीमै गएर सुनाउछु सबै। कति ठाममा कति पटक फलाक्दै हिनुम र भनेर मलाई नि सुनाएनन् , के भा'को हो भनेर। खै पैसा ल्याका जस्तो त मानिन है मैले। बिहान उठेर बरु "म पनि ढलाल हो कि के जाति भएँ। अब म पुनि गामका मुन्छे अरप पठाउँछु। तिम्ले मुन्छे खोज जेठान, म चैँनि उता पासफोटाँ भिस्स्सा कि के जाति हान्नी तारताम्लो मिलाउँछु। अब गामका मुन्छे बिदेश पठा'र गामको बिकास अर्न परो" भन्थे। "तिम्लाई तिन भागको दुइभाग नाफा पनि दिम्ला" भने। अन्त्याँसी जानी मुन्छे मइले खोज्न पर्नी भा'सी आधा-आधी अर्न परो नि भनेको म सँग फनक्क रिसाए। खुट्टा नि खोच्च्याउँदै हिन्छन्। मुग्लानाँ'ट के के जाति रोउ बोकेर ल्या का हुन कि, कुन्नि। पैला डाउटरकाँ ग'र चैनि क्यै रोग-ब्याध छैन भनेर लेखेको एउटो लिस्टो ल्याउ, अनि बल्ल जमुनी लैजाउला भनेको, रिसले भुनभुनाउँदै हिनेका थे। जाँदा जाँदै तगेराको एउटा गराली नै भाँचेर हिनेछन। देशाँ बसे'र आ'सि नि ढोँटे रिस जस्ताको तस्तै रे'छ के तिनको त। :p :-) -भउते
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hetterika!!
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Posted on 01-02-07 2:45
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हैन यो भउतेले नबुझ्या कि मैले नबुझ्या भन्या? तिन भागको दुइभाग नाफा दिम्ला भन्दा आधा-आधी अर्न परो किन भन्या हो? फेरि तेसो भन्दा सिरे खुरुक्क नमानेर किन फनक्क रिसा' हो? कि दुईटैलाई थोरै लिन मुन ला'हो? खै क्या हो क्या हो? :-)
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nepalean
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Posted on 01-02-07 2:53
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धन्यबाद छ रातेलाइ, म हराको छैन यसो लरबरिएको मात्रै हो । मलाइ भन्दा पनि ठुलीलाइ अली धेरै वेलकम वेक । अरपबाट आछन के रे सिरे बाक्लो पैसा कमार, सिरेलाइ त अझ ठुलो र बाक्लो वेलकम व्याक ।
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world_map
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Posted on 01-02-07 3:01
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हा हा! हरी, त्यही त आज भौतेले हिसाब गर्न भुल्यो जस्तो छ। तीन भागको दुइभाग दिन्छु भन्दा आधा आधा मागेको रे! :O जुरेलीलाइ सम्झिंदा सम्झिंदा बिचराको दिमाग पनि के भएछ कुन्नि।
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Posted on 01-02-07 3:06
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:-) हरि। हिजो जवैँ -जेठान भ'र त्यौ चैइनि जवैँले ल्या'को बिकासे रउसी खा'को। त्यो त सारै मापाको पो हुनिर'च त। यत्तिकै खाँदा त घाँटी मै हुरुरुरुरुरुरुरुरुरुरुरुरुरुर आगो पर्ला जस्तो हुनि र'च। अनि पानी मिसा'र खानु पर्नी र'च। हाम्रो धोबिनीले बनाउनी ३-पाने भुन्दा त कता हो कता तिख्खर हुनि के। आज नि त्यसैले झिमझिम बनाइर'च गाँठे। के बोलेँ भन्दा के हुनि। मलाई के को २ भाग दिन्थे। त्यसो भा'त म नमान्दा हुम र। कुरो त बुझ्छु नि। खाश भन्न खोजेको ३ भागको १ भाग हो के रे। जिब्रो चिप्लेछ। तीन किलास सम्म त पढेकै हो के रे नि मैले नि। त्यो गणितको कितापमा बाटुलो पैसो जस्तो चित्रलाई ३ भागको २ भाग रङ्गाउ भनेर दे'को थ्यो। अब हाम्ले त्यो बेला हिजा'ज जस्तो के का रङ पाउनु र। अनि पाकेको किम्बु दलेर रङ्गाको, किम्बु धेरै भे'छ, ३ भागको २ भाग त चौटै उड्यो नि, भिजेर। :-)
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hetterika!!
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Posted on 01-02-07 3:18
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हेत्तेरिका!! कैले सिक्ने होलान हाम्रा गाम्ले ले यो रउसी सउसी खा'र लेनदेन को हिसाप नअर्नु भनेर ? अब जान्ने बुज्ने भन्याहुर्को त यो ताल छ, अरुको के होला? खै पूण्टे दाई भा' भए त सम्झाउँदा हुन भन्या कता लाएचन कुन्नी देखा पर्या हैनन। बरु त्यो सिरेले ल्या'को बिकासे रउसी अलि अलि चाख्न पाए नि हुने नि, यो खो.बि. खाँदा खाँदा जिब्रि नै लठ्ठी सको। :-)
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Poonte
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Posted on 01-02-07 3:33
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ठुली नेपालऽट फर्किनि साईतै कुरेर बसे रे'च के रे सिरे, सँग सँगै आईपुगे दुवै। बुठेसकालाँ बुरुरु कपाल उम्रे जस्तै भ'च गाँठे हाम्लाई त! ठुली नेपालाँ घर परिवारसमग कुरो मिला'र आ' होली के रे। चित्रे कुरि रा'छ, बरु भोज सोझ चाँढै ख्वाम् अब। मेरी धोबीनीलाई फुला'र १२ ठेकी रौसी पार्न लाम्नि जिम्मा मेरो भो, ल! अरापऽट सिरे फर्केछ भुन्ने सुनेर मु नि हिजो लौरो कुद्दै, खुट्टा टेक्दै भ' नि पुगेको थिम् के रे तेस्को घराँ। नोठको बिट्टै बिट्टा बोकेर आ'को उरन्ठेगलो, के घर बस्थो? धोबिनी काँ ३ सोट ला'र जिम्माले काँ पुगेछन् भने। अन्खेरुन आफू नि तेतेई लागियो जिम्मालेलै के के भने, कुन्नि? बुठोको त भरखर भूत देखेओ जस्तो बोली फुटि रा' थेन। "अरपाँ मुन्छे काटेको खबर त समचराँ सुनेको थियेऊ होला नि, बुढा! हाम्ले नि सिकेर आईम् के रे मुन नपर्ने मुन्छेलै तेस्तेई अर्न, बिचार अर" भुनेर जिम्माल्निको धरि सातो लग्यो रे भुनेर सुनेको हो के रे गाईं गुईं हल्ला। हुन त काठमन्छु सम्मुन् पुरा'र जहाज उड्नि पैसो को चाँजो त हाम्ले नै गर्देला थिम् के रे। जिम्माललै भेट्नि बखत चईं उनको नि मगजको नसा तन्केको थो होला, हाम्लाई अँगालो सम्म नि हालेनन्। लु त नि, सिरे, आईछौ, बेसरी कमायेऊ पनि होला, खाडीको कथा सुन्नि रहर त हाम्लाई नि थो, एउ दिन बसेर घुटकाउँदै बात मारम्ला भनें। "ईन सल्लाह" भने सिरेले चईं। कमाई गरेर पैसो को थुप्रो बोक्ने भएसि त दिल पुनि कठोर भइच के रे। तेत्रो अरेर बिदेस पठा'को हाम्ले, अईले आ'र एउछिन बसेर भलाखुसारी अरम् भुन्दा नि के को "सल्लाह" अर्न पर्नि हो उनलाई?
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Rahuldai
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Posted on 01-02-07 5:19
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पून्टे, भउते, चित्रे, नेपे, सिरे, ठुलनानी, हत्तेरिका, बिर्खे सब लाई तारेमाम है । हाम्रो गाम को भाषा नै अर्क पर्यो, छु धागु, छु धागु क ? दिमाग हे गद्बदका ।
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Posted on 01-02-07 5:27
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हे हे हे म पछाडि बाट आए भन्छु र ( i am back) के छ हो गाम्ले । सिरे भीनाजू आउनु भएछ फर्केर । जमुनी दिदी ले नया सारी ला'र नया अरबी झोला अरबि जुत्ता अनि खेरि अरबी मजेत्रो हालेकी। लौन बा कलिजुग सक्केर कुन जुग आउन थाल्यो छ त्यो अरबाँट ले को कालो माजेत्रो लाउदा त जमुनी दिदी भुत जस्तै देखिएकि :P :P
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sunima_sh
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Posted on 01-02-07 6:09
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नयाँ मान्छे को पुरनो मान्छेहरुलाई स्वागत
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floraj
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Posted on 01-02-07 6:30
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मेरो पनि हप्पी न्यू एअर है सबै लाई, चुतरिमा नपसेको पनि धरै भयो फुर्सद नै नवयरा बल्ल टाईम मिल्यो ल अनि वीरखे मैलो को पून्ते दा को क ६ नि? मेरो हुन नसकेको जेठान्हरु , हाहाहाहा, अनि चित्रे तिम्रो चै क ६ नि?
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vivasg
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Posted on 01-02-07 6:53
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आफ्ना हुन नसकेका सबै आफ न्त हरुलाई नमस्ते यो गोर्खाल गोर्खालि को !!!!
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floraj
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Posted on 01-02-07 7:10
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LIKE THE TREE NEEDS THE EARTH LIKE THE NIGHT NEEDS THE MOON LIKE THE STARS NEEDS THE SKY LIKE THE GUITER NEEDS THE TUNE My World Needs You............ I miss you...........
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Posted on 01-02-07 8:12
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vivasg
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Posted on 01-02-07 10:13
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aja kata gaye khoi gamle haru ??? kina ho sappai chu chap ??? la ta mu ta gayo ochhyana !!! boo - baaiiiii ............
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lau ta lau
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Posted on 01-02-07 11:34
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ओहोनि, होत रचनी सिरेले भनेझै, चौपारीत गांठे रंङी बिरंङी पो बनाएचन! २ बर्ष मौलान तिरै चइनि अल्झियोकेरे के के नै अरम्ला भनेर। यत्रो हुन्तोनी, जस्ता थिए पुसाई उस्ताका उस्तै। ऐ सिरे कता कता हिन्या छौ? बल्ल बल्ल दैलां भेट्केको जिउ किन उचल उचल पार्याछौ हे। मेरांतिर झर भो जे भओ भओ लौ, आज धेरै पछि जिम्माल बा, पुन्टे दाई, दादा, गोतांए, नमे, चित्रे, भउते आफ्ना दामालिसित बसेर तुच्च तुच्च पार्न पर्यो।
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