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hetterika!!
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Posted on 01-02-07 11:19
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के गर्दै छौ मामा बुढा अहिले? सन्चै ?
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Birkhe_Maila
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Posted on 01-02-07 11:21
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प्याच्च बोल्न मुन लाओ! यि दादा नि अगेर कल्ले हो बनाओ चौतारिआँ छपनि भएन भुनेर फत्फताइरा थे, एसपालि आफैँले एउडा गमलाँ राख्ने फुलको बुटा अस्तो जिनिसलाई चौतारि भुनेर राखेछन्! यो चौराँ फुला माला गाँस्तै बस्नु?? फेरि मजाले देखिने भा' नि हुन्तो! उसै त बुडेउलिले अर्दा आँखोले तेति ठम्माम्दैन तेसमाथि यो फुला बुटा हेर्न बलडेङ्ग्रे चस्मा लाम्नु पर्ने!!! हरिशरणम!!
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Birkhe_Maila
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Posted on 01-02-07 11:23
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सन्चै छु भन्नु परो भान्जो।जाडोले ज्यानै लिन लाइसको! हाड सम्म चिसो छिर्छ गाँठे!
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hetterika!!
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Posted on 01-02-07 11:36
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तेस्तै हो गाँठे, हामी ठिटाहरु लाई त सताई रा'छ यो जाडोले। मामाको त झन बुढो हड्डी, ख्याल गरुम है, बित्याँस पार्ला नि।
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Birkhe_Maila
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Posted on 01-02-07 11:58
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भान्जो मात्तै रेछ याँ त! कता अन्मरिए अरु? भउते बज्जे र यामे उता पल्लो गाममा इस्कुल हो कि के को हो कुरो अर्दै रेछन अउँरेजिमा!
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gwanche
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Posted on 01-02-07 12:03
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हरि, जिम्मालबा नमस्ते अरे है! के छ हालखबर, सँचै ?
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Rahuldai
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Posted on 01-02-07 12:19
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तारेमाम्, सबै लाई, नयाँ चौतारी सुस्ताए छ कि क्या हो, धेरै जना छुट्टीमा हो कि?
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Hi_nanu
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Posted on 01-02-07 12:24
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ल मेरो पनि नया बर्षको नमस्ते है।।अनि १ बर्षको बिदामा साथिभाइहरुले के गर्नु भो कुन्नि?
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Rahuldai
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Posted on 01-02-07 12:28
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दाम छैन, काम छैन, त्यसैले राम राम भन्दै बसें, नयाँ सालको छुट्टीमा । नानु जी ले के गर्नु भयो, सुनम न हामी पनि ।
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Hi_nanu
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Posted on 01-02-07 12:40
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के गर्नु दाइ?मेरो पनि हाल आम नेपालिको जस्तै त हो नि।।।छोरि सँग बसेर खेलियो।।मोमो खाइयो अनि छोरिले नदेख्ने गरेर लुकेर बिएर पिइयो।।फिल्म् हेरियो।।गर्द गर्दै एक् बर्स बिति हालेछ नि।।।थाहा नै पाइएन।।। अनि साझामा तपाइहरुका बिचारहरु पढ्न पाएपछि त समय गाको पत्तै हुदैन नि।।।।
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world_map
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Posted on 01-02-07 2:02
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ठूली, तिम्रो लागि कविता यो :) चौतारी नै रमाइरहेछ तिम्रो आगमनमा फूलपात फर्फराइरहेछन् शीतल पवनमा तिमीलाइ देखी हाँस्यो फेरी मेरो मन कति अन्जान अनौठो छ यो बन्धन
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uptowngal
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Posted on 01-02-07 2:18
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Birkhe_Maila
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Posted on 01-02-07 2:29
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ओहो ठुल्नानि! नेपाल को राम्रो राम्रो फोटो टाँसन है?
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hetterika!!
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Posted on 01-02-07 2:38
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ओहो ठुल्नानि! नेपाल को राम्रो राम्रो फोटो टाँसन है?
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Posted on 01-02-07 2:38
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वाह वाह ! चित्रे। मयाँ पिरती होस त यस्तो। आफ्नो त जुरेली अझै भेना कै चङ्गुलमा छे। :-( सिरे जवैँ कता मोरेचन आज ? हिजो बात मार्दा मार्दै फ्वाँ फ्वाँ निधाए। भोलि चौतारीमै गएर सुनाउछु सबै। कति ठाममा कति पटक फलाक्दै हिनुम र भनेर मलाई नि सुनाएनन् , के भा'को हो भनेर। खै पैसा ल्याका जस्तो त मानिन है मैले। बिहान उठेर बरु "म पनि ढलाल हो कि के जाति भएँ। अब म पुनि गामका मुन्छे अरप पठाउँछु। तिम्ले मुन्छे खोज जेठान, म चैँनि उता पासफोटाँ भिस्स्सा कि के जाति हान्नी तारताम्लो मिलाउँछु। अब गामका मुन्छे बिदेश पठा'र गामको बिकास अर्न परो" भन्थे। "तिम्लाई तिन भागको दुइभाग नाफा पनि दिम्ला" भने। अन्त्याँसी जानी मुन्छे मइले खोज्न पर्नी भा'सी आधा-आधी अर्न परो नि भनेको म सँग फनक्क रिसाए। खुट्टा नि खोच्च्याउँदै हिन्छन्। मुग्लानाँ'ट के के जाति रोउ बोकेर ल्या का हुन कि, कुन्नि। पैला डाउटरकाँ ग'र चैनि क्यै रोग-ब्याध छैन भनेर लेखेको एउटो लिस्टो ल्याउ, अनि बल्ल जमुनी लैजाउला भनेको, रिसले भुनभुनाउँदै हिनेका थे। जाँदा जाँदै तगेराको एउटा गराली नै भाँचेर हिनेछन। देशाँ बसे'र आ'सि नि ढोँटे रिस जस्ताको तस्तै रे'छ के तिनको त। :p :-) -भउते
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hetterika!!
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Posted on 01-02-07 2:45
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हैन यो भउतेले नबुझ्या कि मैले नबुझ्या भन्या? तिन भागको दुइभाग नाफा दिम्ला भन्दा आधा-आधी अर्न परो किन भन्या हो? फेरि तेसो भन्दा सिरे खुरुक्क नमानेर किन फनक्क रिसा' हो? कि दुईटैलाई थोरै लिन मुन ला'हो? खै क्या हो क्या हो? :-)
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nepalean
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Posted on 01-02-07 2:53
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धन्यबाद छ रातेलाइ, म हराको छैन यसो लरबरिएको मात्रै हो । मलाइ भन्दा पनि ठुलीलाइ अली धेरै वेलकम वेक । अरपबाट आछन के रे सिरे बाक्लो पैसा कमार, सिरेलाइ त अझ ठुलो र बाक्लो वेलकम व्याक ।
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world_map
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Posted on 01-02-07 3:01
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हा हा! हरी, त्यही त आज भौतेले हिसाब गर्न भुल्यो जस्तो छ। तीन भागको दुइभाग दिन्छु भन्दा आधा आधा मागेको रे! :O जुरेलीलाइ सम्झिंदा सम्झिंदा बिचराको दिमाग पनि के भएछ कुन्नि।
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Posted on 01-02-07 3:06
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:-) हरि। हिजो जवैँ -जेठान भ'र त्यौ चैइनि जवैँले ल्या'को बिकासे रउसी खा'को। त्यो त सारै मापाको पो हुनिर'च त। यत्तिकै खाँदा त घाँटी मै हुरुरुरुरुरुरुरुरुरुरुरुरुरुर आगो पर्ला जस्तो हुनि र'च। अनि पानी मिसा'र खानु पर्नी र'च। हाम्रो धोबिनीले बनाउनी ३-पाने भुन्दा त कता हो कता तिख्खर हुनि के। आज नि त्यसैले झिमझिम बनाइर'च गाँठे। के बोलेँ भन्दा के हुनि। मलाई के को २ भाग दिन्थे। त्यसो भा'त म नमान्दा हुम र। कुरो त बुझ्छु नि। खाश भन्न खोजेको ३ भागको १ भाग हो के रे। जिब्रो चिप्लेछ। तीन किलास सम्म त पढेकै हो के रे नि मैले नि। त्यो गणितको कितापमा बाटुलो पैसो जस्तो चित्रलाई ३ भागको २ भाग रङ्गाउ भनेर दे'को थ्यो। अब हाम्ले त्यो बेला हिजा'ज जस्तो के का रङ पाउनु र। अनि पाकेको किम्बु दलेर रङ्गाको, किम्बु धेरै भे'छ, ३ भागको २ भाग त चौटै उड्यो नि, भिजेर। :-)
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hetterika!!
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Posted on 01-02-07 3:18
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हेत्तेरिका!! कैले सिक्ने होलान हाम्रा गाम्ले ले यो रउसी सउसी खा'र लेनदेन को हिसाप नअर्नु भनेर ? अब जान्ने बुज्ने भन्याहुर्को त यो ताल छ, अरुको के होला? खै पूण्टे दाई भा' भए त सम्झाउँदा हुन भन्या कता लाएचन कुन्नी देखा पर्या हैनन। बरु त्यो सिरेले ल्या'को बिकासे रउसी अलि अलि चाख्न पाए नि हुने नि, यो खो.बि. खाँदा खाँदा जिब्रि नै लठ्ठी सको। :-)
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