What a shame

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Now 10 days to go and Preparation for commonwealth game is like this, what a shame!! [Disallowed String for - ] src="http://timesofindia.indiatimes..."> sorry guys somehow video is not being posted I don't know why  finally i found story in hindi edition दुनियाभर में हुई फजीहत के बाद और विदेशी प्रतिनिधियों के दिल्ली आने से कुछ ही घंटे पहले कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज की साफ सफाई और उसमें सभी सुविधाएं मुहैया कराने का जिम्मा अब दिल्ली सरकार को सौंप दिया गया है। दिल्ली सरकार ने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि गेम्स विलेज की कमियों को अगले 24 घंटे में दुरुस्त कर दिया जाए और विदेशी खिलाडि़यों और प्रतिनिधियों की जरूरत की सभी सुविधाएं विलेज में मुहैया कराई जाएं। इस काम में दिल्ली सरकार ने पांच सितारा होटलों के सुपरवाइजरों को भी बुलाकर उनकी मदद लेना शुरू कर दिया है। अब तक कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज का जिम्मा डीडीए के पास था, लेकिन गेम्स विलेज में फैली गंदगी और वहां की बदइंतजामी पर कई देशों की आलोचना के बाद गुरुवार रात को कैबिनेट सेक्रेटरी ने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज का जिम्मा सौंपा। इसके बाद गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री ने लगभग तीन घंटे तक गेम्स विलेज का जायजा लिया और वहां की कमियों को देखा। उन्होंने अपने अधिकारियों से कहा कि अब वक्त बहुत कम है और इसी में काम पूरा किया जाना है। दिल्ली सरकार के सूत्रों का कहना है कि गेम्स विलेज में वाकई बदइंतजामी का नजारा है। गंदगी तो है ही। खिलाडि़यों के किसी रूम में नल से पानी नहीं आ रहा , तो कहीं बिजली के स्विच काम नहीं कर रहे। गुरुवार सुबह जब मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद अफसरों से पूछा कि अगर कोई लिफ्ट अचानक बंद हो जाए तो आपात स्थिति के लिए क्या इंतजाम हैं। इस पर पता चला कि उसके लिए कोई तैयारी ही नहीं की गई। इसी तरह कई कमरों की हालत भी बहुत खराब थी। वहां निर्माण के दौरान जो सीमेंट गिरा था , उसे साफ ही नहीं किया गया। सफाई के लिए तीन कंपनियों के पास ठेका है , लेकिन वहां गंदगी ज्यादा नजर आ रही थी। गेम्स विलेज में बनाए गए आलीशान कमरों में फोन तो लगाए गए हैं , लेकिन उन्हें जमीन पर ही छोड़ दिया गया। इसी तरह अगर कमरे में नल से पानी नहीं आ रहा तो खिलाड़ी किस नंबर पर सहायता मांग सकते हैं , इस बारे में कोई लिस्ट नहीं मौजूद नहीं है। गेम्स विलेज के 34 टावरों में प्लंबर , इलेक्ट्रीशियन , कारपेंटर आदि की व्यवस्था ही नहीं है। बताया गया कि मेंटिनेंस जोन अलग हटकर बनाया गया है , लेकिन इसमें किसी खराबी का कैसे पता चलेगा , इसके बारे में सोचा ही नहीं गया। महत्वपूर्ण है कि गेम्स विलेज में जो सामान लगाया गया , वह सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं , इसकी जांच ही नहीं की गई। दिल्ली सरकार के एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि इस तरह की हजारों कमियां गेम्स विलेज में है। अब दिल्ली सरकार ने अपने 40 दानिक्स अफसर वहां तैनात किए हैं। गेम्स विलेज के हर टावर का इंचार्ज दानिक्स अफसर को बनाया गया है। इसके अलावा हर टावर के लिए फाइवस्टार होटल के सुपरवाइजरों को भी विलेज में लाया जा रहा है। ये अफसर अब यह पता लगा रहे हैं कि कुल प्लंबर , इलेक्ट्रीशियन और कारपेंटरों की संख्या कितनी है , ताकि हर टावर के लिए कुछ कर्मचारी स्थायी तौर पर तैनात किए जाएं और खराबी आते ही उसे दुरुस्त किया जा सके। इसी तरह अफसरों को बिजली , प्लंबर , कारपेंटर , हाउसकीपिंग और रिप्लेस किए जाने वाले सामान के लिए अलग - अलग ब्यौरा तैयार करके दिया गया है और उन्हें कहा गया है कि वे हर फ्लैट में एक - एक सामान की खुद जांच करें और अगर किसी सामान में गड़बड़ी है तो उसे नोट करके दुरुस्त कराएं व 24 घंटे के भीतर इस काम को पूरा करें। Last edited: 23-Sep-10 01:56 PM

_____ · Sep 23, 2010 1:47 PM · 2,299 views

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[Disallowed String for - ] src="http://timesofindia.indiatimes...">

_____ · Sep 23, 2010 1:49 PM

साउंड और स्कोरिंग का ट्रायल अब तक नहीं मनीष अग्रवाल ॥ नई दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स शुरू होने में अब सिर्फ 10 दिन बचे हैं लेकिन अभी तक इसके लिए किसी भी गेम्स वेन्यू से टीवी परदिखाए जानेवाले खेलों के लिए साउंड, कमेंट्री और स्कोरिंग का ट्रायल नहीं हो पाया है। सूत्रों का कहना है कि यह काम 15 दिन पहले ही शुरू हो जाना चाहिए था। यह सारा काम कॉमनवेल्थ गेम्स की ऑर्गनाइजिंग कमिटी को करना है। एमटीएनएल ने करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से सभी गेम्स वेन्यू, खेल गांव, प्रगति मैदान और दिल्ली पुलिसमुख्यालय सहित दिल्ली की उन पहचान वाले सभी पांच ब्यूटी स्पॉट पर करीब एक महीना पहलेकेबल बिछाने का काम पूरा कर दिया है जो खेलों के दौरान दुनिया भर में प्रसारण करने और सुरक्षा के काम आएंगी। सूत्रों का कहना है कि जिन गेम्स वेन्यूमें खेल होंगे उन्हें टीवी पर प्रसारित करने से पहले उनका ट्रायल करना बेहद जरूरी होता है। दुनिया के जिस भी देश में ऐसे खेल हुए हैं वहां इसके लिए कम से कम 15 दिन पहले इनका ट्रायल शुरू हो जाता है। ट्रायल में ऐसी कमियों का पता लग जाता है जिसमें किसी गेम्स वेन्यू से आवाज नहीं आ रही है तो किसी से पिक्चर गायब हो रही है। किसी गेम्स वेन्यूमें यह भी कमी हो सकती है कि वहां से कमेंट्री की आवाज ही साफ नहीं आ पा रही हैं। यह सारी समस्याएं सुलझाने के लिए ही इनका ट्रायल करना जरूरी होता है, लेकिन अभी तक इस काम के लिए ऑर्गनाइजिंग कमिटी गंभीर दिखाई नहीं दे रही है। हां, दिल्ली पुलिस ने अपना काम जरूर बखूबी निभाया है और उसने सुरक्षा इंतजामों के लिए सभी गेम्स वेन्यू से सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से इनपुट लेकर अपना ट्रायल कर लिया है। सूत्रों ने बताया कि सोमवार को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के लिए इस तरह का ट्रायल जरूरकिया गया था, लेकिन ट्रायल के दौरान इसमें कई तरह की कमियां सामने आईं। इन कमियों को पूरा करने के लिए इंजीनियरों गया। सूत्रों ने बताया है कि अगर गेम्स केदौरान इस काम में किसी भी तरह की समस्या आई या कुछ देर के लिए प्रसारण रुक गया तो देश की इज्जत इससे दांव पर लग जाएगी। source: http://navbharattimes.indiatim... Last edited: 23-Sep-10 07:49 PM

_____ · Sep 23, 2010 7:44 PM

वो करके दिखाएगा, जैसे भि हो खेल खेला जाएगा, जमुनाके किनारमे अब्स्थित ए कही बाड गंगामे न बह जाए । Heard in NPR news. Too sad, they did not start construction work until 2008, still they do not have good co-ordination. Most annoying part is, bathroom and toilet has big problem.

bhojpure01 · Sep 23, 2010 11:04 PM

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